Sonnu Lamba
Abstract
अब जबकि मौत पूरे
तामझाम के साथ घूम रही है
धरती पर !
कुछ कहना है किसी से,
तो कह दीजीए ना
अनकही बाते सुई सी चुभती हैं!
सांसो का क्या भरोसा,
जीवन काले सायो से घिरा है
मन्नतों के धागे, प्रेम से बांधने होंगें !
कह दीजिए ना
फरियादें
हंसी
उम्मीदें
सुबह
अन्नपूर्णा
महामारी
देवदूत
यादें
उम्मीद
मायूसी को मुस्कान बनाकर माँ बाप की दुआओं को ढाल बनाकर मायूसी को मुस्कान बनाकर माँ बाप की दुआओं को ढाल बनाकर
होली का रंग चढ़ा ऐसा यादों का गुलाल उड़ने लगा। होली का रंग चढ़ा ऐसा यादों का गुलाल उड़ने लगा।
विश्वास की हल्दी का पीला रंग अपने रिश्ते की देह पर मल देना। विश्वास की हल्दी का पीला रंग अपने रिश्ते की देह पर मल देना।
पूरी कायनात मुर्दाघर की मानिंद सर्द हो गई है। पूरी कायनात मुर्दाघर की मानिंद सर्द हो गई है।
तब तक हम बेपरवाह ही रहते हैं, हर समस्या का समाधान पिता में ही दिखते हैं। तब तक हम बेपरवाह ही रहते हैं, हर समस्या का समाधान पिता में ही दिखते हैं।
काम की ये जिंदगी है अब ना कोई ख्वाहिश ना जुस्तजू है काम की ये जिंदगी है अब ना कोई ख्वाहिश ना जुस्तजू है
सड़कों पर आवाज लगाते बच्चों को करतब करते देखा सड़कों पर आवाज लगाते बच्चों को करतब करते देखा
एकान्तता हो तुम, उस सागर किनारे जैसी, एकान्तता हो तुम, उस सागर किनारे जैसी,
ज़िम्मेदारी में बोझिल हो गए थे, बैठना चाहते है, बच्चों के पास , ज़िम्मेदारी में बोझिल हो गए थे, बैठना चाहते है, बच्चों के पास ,
किंतु जो थे स्वाभिमानी स्वतंत्र और समर्थ भी किंतु जो थे स्वाभिमानी स्वतंत्र और समर्थ भी
इससे पहले कि शब्दों की आग जमकर बर्फ़ बन जाए इससे पहले कि शब्दों की आग जमकर बर्फ़ बन जाए
रात की चादर में लिपटे हुए न जाने कितने किस्से, किसी को करती है बर्बाद तो किसी को आसरा रात की चादर में लिपटे हुए न जाने कितने किस्से, किसी को करती है बर्बाद तो किसी...
जिंदगी की हकीकत में उन्हें हम ढूंढ लेते हैं जिंदगी की हकीकत में उन्हें हम ढूंढ लेते हैं
विधाता, जब पुरुष होता है- युद्ध करता है! विधाता, जब पुरुष होता है- युद्ध करता है!
हिरण्य कश्यप ने अत्याचार बढ़ाया बहन होलिका को वरदान मिला था हिरण्य कश्यप ने अत्याचार बढ़ाया बहन होलिका को वरदान मिला था
हर पीढ़ी है ख़ास- हर पीढ़ी ख़ूबसूरत सामान्यीकरण है अन्याय हर पीढ़ी के साथ ! हर पीढ़ी है ख़ास- हर पीढ़ी ख़ूबसूरत सामान्यीकरण है अन्याय हर पीढ़ी के साथ !
कुदरत ने ऐसा ताना बाना बुना है घर, परिवार की इकाई को जोड़ समाज का रुप दिया है, कुदरत ने ऐसा ताना बाना बुना है घर, परिवार की इकाई को जोड़ समाज का रुप दिया...
एक सुरीली आवाज, दर्द के तरानों में, हिलोरे लेती, एक सुरीली आवाज, दर्द के तरानों में, हिलोरे लेती,
लौकिक - अलौकिक में सबसे ऊपर जीवन का सार बस प्रेम ही तो है। लौकिक - अलौकिक में सबसे ऊपर जीवन का सार बस प्रेम ही तो है।
भस्म रंग लपेटे गले में गरल पिचकारी भस्म रंग लपेटे गले में गरल पिचकारी