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Apoorva Dixit

Abstract Inspirational

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Apoorva Dixit

Abstract Inspirational

उद्यम

उद्यम

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कुछ दो चार दिनों से देख रही दिनमणि को आते जाते,
सर्वप्रथम आकर कैसे उदयित व्योम कर जाते।

बादल छाएं हों अम्बर पर चाहे हो घनघोर घटा,
वसुधा का कण कण निज किरणों से अलंकृत कर जाते।

कुछ सीख सिखाते मानव को नित कर्म मार्ग पर चलने की ,
अंधकारमय निशा समान मन के तिमिरो को हरने की।

यदि श्रेष्ठ जगत में बनना है तो श्रेष्ठ कर्म करना होगा ,
 सूर्य समान चमकने को उद्यम कर नित तपना होगा।

यदि दुर्लभ मणियां पानी हैं तो विषधरों से टकराना होगा,
साथ जगत ये चले न चले तुमको खुद राह बनाना होगा।

अभिलाषा यदि शिखरों की है तो चट्टानों से टकराना होगा,
अस्तित्व स्वयं का पाना है तो निज कर को स्वयं थामना होगा।

संसार चले न चले साथ,
तुमको निज साथ निभाना होगा।।

                                    _अपूर्वा दीक्षित


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