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Kishan Negi

Romance

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Kishan Negi

Romance

उधारी के कुछ लम्हे

उधारी के कुछ लम्हे

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तेरे उधार के वक्त से

चुराकर एकाकीपन के कुछ लम्हे

तकिये के नीचे छिपा कर रखे थे मैंने,

रात करवटें बदलती रही तो

चादर की सिमटी सलवटों से

एक मासूम-सा लम्हा

ऊँघता हुआ मुस्कुरा दिया,

फिर उछल कर

बैठ गया मेरे रसीले लबों पर।

उस वक्त टूटी छत पर

कोई और न था हमारे सिवा

एक दूजे से दिल की बातें करते-करते

न जाने कब नींद ने जकड़ लिया मुझे,

लाल मखमली चादर में

भोर होते ही जब आँख खुली तो

खुद को अकेले पाया,

वो नन्हा-सा नादां तन्हाई का पल

चुराया था जिसे तेरे वक्त से

नामालूम किस दिशा चल दिया,

कितने मनमोहक, कितने दिलकश

कितने उल्लसित, कितने प्रफ्फुलित

थे उस रात के यादगार लम्हे ,

क्या फिर से लौटेंगे ?

वो अद्भुत चिरस्मरणीय क्षण

वो अनूठे अविस्मरणीय पल ?



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