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Dr.Purnima Rai

Romance

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Dr.Purnima Rai

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तुम्हें पाने की तमन्ना नहीं खोने का डर

तुम्हें पाने की तमन्ना नहीं खोने का डर

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तुम्हें पाने की तमन्ना नही खोने का डर।

बस यूँ ही गुज़र जाये जिंदगी का सफर ।।

जलता रहा था दीया तेज़ आंधियों में ,

अंधेरे को चीरकर बसा प्रेम का नगर।।

क्यों समझ न पाये दबे जज़्बात दिलों के

बरसाते रहे महज अल्फ़ाज़ का कहर। ।

फ़िजा भी महकने लगी औ' खिल गयी कुदरत

तेरे आने की मिली जब हवा को खबर।।

सुलग रहा भीतर धुआं याद की आंच से

चिंगारी बनी "पूर्णिमा "नभ को चूमकर।।


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