तुम्हे पाना चाहा
तुम्हे पाना चाहा
चाहत तो बहुत थी तुम्हे पाने की
मेरी नाकामी ने मुझे कहीं का न छोड़ा
इबादत से आगे बढ़के अपनाना चाहा
बेरूखी ने तेरी मुझे कहीं का न छोड़ा
टूटता रहा मैं फिर भी तुम्हे पाना चाहा
तेरी नाराजगी ने मुझे कहीं का न छोड़ा
बस एक तेरा चेहरा ही हमेशा नज़र आया
जो तेरा चेहरा न दिखा तो इश्क़ ए शीशा तोड़ा
झूठी तारीफें करना मुझे आता नहीं
शायद तभी तो तुमने मेरा दामन छोड़ा।

