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Kumar Vikash

Romance

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Kumar Vikash

Romance

तुम्हे पाना चाहा

तुम्हे पाना चाहा

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चाहत तो बहुत थी तुम्हे पाने की

मेरी नाकामी ने मुझे कहीं का न छोड़ा


इबादत से आगे बढ़के अपनाना चाहा

बेरूखी ने तेरी मुझे कहीं का न छोड़ा


टूटता रहा मैं फिर भी तुम्हे पाना चाहा

तेरी नाराजगी ने मुझे कहीं का न छोड़ा


बस एक तेरा चेहरा ही हमेशा नज़र आया

जो तेरा चेहरा न दिखा तो इश्क़ ए शीशा तोड़ा


झूठी तारीफें करना मुझे आता नहीं

शायद तभी तो तुमने मेरा दामन छोड़ा।


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