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Pragya Hari

Romance Fantasy

4.6  

Pragya Hari

Romance Fantasy

तुम्हारी कमी है

तुम्हारी कमी है

1 min
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बसंत हर्षित आया है

कलियों पर रंग चटकाया है

धरा का हृदय मुदित है

पर तुम्हारी कमी है , 


सावन घटा गरजे हैं

मल्हार राग बरसे हैं

धरा का रोम रोम तर है

पर तुम्हारी कमी है , 


चांद नभ पर आया है

तारों की झुरमुट भी लाया है 

निशा खेलती आंख-मिचौली 

पर तुम्हारी कमी है ,


हृदय कोंपल मुरझाया है 

अधर न ये मुस्काया है 

आ जाओ अब कि 

बस तुम्हारी कमी है।


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