तुम्हारे लिए
तुम्हारे लिए
रिश्ता ये कैसा जुड़ गया तुमसे
रह नही पाता एक पल भी तुम बिन
तुम्हे ही देखकर नींद आती है मुझे
सपनो में भी तुम ही दिखती हो
तुमसे ही मेरी हर सुबह होती है
उठते ही तेरा चेहरा देखना चाहूं
तू जो ना दिखे एक पल भी
तो मै उस पल जीना ना चाहूं
मैं सिर्फ तेरे लिए जीना चाहूं।।

