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V. Aaradhyaa

Romance

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V. Aaradhyaa

Romance

तुम्हारे चेहरे की आभा

तुम्हारे चेहरे की आभा

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आज कहूँ जो दिल की बात तो

वो बच्चों सी किलक जाती है,

उसके चेहरे की स्वर्णिम आभा

मेरा पूरा जीवन अलोकित करती है!


जीवन रूपी लम्बे सफ़र में वो

कभी सुनहरे भोर सी चमकती है,

तो कभी अपनी सुकुमार बांहों का

बनाकर घेरा रातरानी सी गमकती है!


पल प्रतिपल मेरे मन का हर

हर्फ़ वो जाने कैसे पढ़ लेती है,

एक बात सच बताऊँ सजनी मेरी

तु आठों पहर मेरे हृदय में रहती है।


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