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Minal Aggarwal

Tragedy

4  

Minal Aggarwal

Tragedy

तुम्हारा चेहरा बदल रहा है

तुम्हारा चेहरा बदल रहा है

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तुम्हारा चेहरा 

बदल रहा है 

तुम्हारी तस्वीर 

बदल रही है 

तुम्हारे हाव भाव 

बदल रहे हैं 


तुम्हारी अभिव्यक्ति 

बदल रही है 

तुम्हारे आंचल पर 

अब दाग हैं

तुम्हारे बाहरी रंग, रूप, स्वरूप के 

आवरण और वेशभूषा पर 

अब गंभीर आरोप हैं


तुम्हारे बदन की महक में से 

अब बू आती है 

तुम्हारी बोली से अब 

बंदूक की गोली निकलती है 

तुम्हारा व्यवहार अब 

कड़वा और कठोर है 


तुम्हारे घर के दरवाजे पर 

अब लगा मेरे आने पर 

पहरा है 

तुम्हारे आसपास की हवा 

अब जहरीली है 

तुम्हारे बाग की फिजा अब 

भौंडी और भड़कीली है 

सारा वातावरण अब 

दूषित है

 

सांस एक पल भी लेना अब 

मुश्किल है 

तुमसे मेरा 

यह रिश्ता अब और न

चल पायेगा कि 

हर आवाज अब 

मेरे खिलाफ 

तुम्हारी साजिशों की 

ऊंची बोली है।


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