STORYMIRROR

Neha sharma

Romance

3  

Neha sharma

Romance

तुम्हारा अपलक निहारना

तुम्हारा अपलक निहारना

1 min
222

वो चाय के बहाने तुम्हारा आना 

और मेरे दिल का बेचैन हो जाना

छत पर खड़े होकर

तुम्हें देखना और कभी नजरें चुराना

तुम्हारा अपलक निहारना

तो कभी हौले से मुस्कुराना

यूँ ही निगाहों का निगाहों से टकराना

और न जाने कैसे 

 एक दूसरे के दिल में समाना

 दिल के ऐसे जुड़े थे तार

 मिलता हर सन्देश बिन चिट्ठी बिन तार

 न कभी हुई थी बात 

 न कभी हुई मुलाकात बस

 अहसासों के समंदर में 

 गोते लगा रही थी 

 और उन हसीन पल को

 यादों में पाल रही थी.....

          

 


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance