STORYMIRROR

Neha sharma

Others

4  

Neha sharma

Others

कलम अब रूठने लगी है

कलम अब रूठने लगी है

1 min
581

शब्द हो रहे हैं मौन

इसकी टीस यहाँ

पर समझे कौन

हर शख्स को ऊपरी 

आवरण दिखता है

अंदर का दर्द

 तन्हाई में छलकता है

 पर खुद ही दिल को ढाढ़स

 बंधाना पड़ता है कि

 कोई ऐसा शख्स नहीं

 जो दर्द से नहीं गुजरता है

 जिसने सहन की हो खुद की टीस

 वो ही समझ सकता औरों की पीर

 दिल तो नादान है हर किसी से 

 उम्मीद कर बैठता है

 ये समझता है नहीं कि

 जो ज्यादा अपना बनता है

 वही तो दगा करता है

 देखकर दुनिया की रीत

 नहीं निभाना किसी से प्रीत

 रास आने लगी है तन्हाई

 नहीं भाती अब प्रीत पराई

 सब मतलब के साथी है

 मतलब से साथ निभाते हैं

 कलम भी अब रूठने लगी है

 जब शब्द ही हो गए मौन 

 तो फिर मुझे समझेगा कौन

 समझाया कलम को तुम

 न कभी मुझसे रूठना

 क्योंकि अब तुम्हारा और 

 शब्दों का ही तो सहारा है

 वरना इस भरी दुनिया

 में हमें समझने वाला है ही कौन

 तुम ही हो मेरे सुख दुख के साथी 

 अपना सारा वक़्त भी तुम पर लुटाती

 मेरी भावना, मेरे अहसास को

 तुम ही हो समझते

 लफ्जों को कागज पर उतारकर

 चीख भी लेती हूँ और

 किसी को पता भी नहीं चलता

 दिल हल्का हो जाता है......

                


Rate this content
Log in