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Neha sharma

Abstract

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Neha sharma

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मुस्कुराना सीख लिया

मुस्कुराना सीख लिया

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तपते मरुस्थल से दिल पर

जब पड़ी तेरे प्यार की

बारिश की बूँदें सच मानो

अंतर्मन तक को भिगो गया

तेरी बेरुखी से जो जख्म

लगे हैं मेरे मन पर

पलकों से गिरी बूँदों ने

रुख़सार को भिगो दिया

यादों का भँवर जो आकर

दे जाता है दिल में दस्तक

वीरान पड़े इस दिल में

इक मीठी सी हलचल मचा दिया।



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