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Surendra kumar singh

Romance

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Surendra kumar singh

Romance

तुम्हारा आलिंगन

तुम्हारा आलिंगन

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कितना सुखद है

तुम्हारा ये आलिंगन

दुनिया मे ही

दुनिया से अलग।

दुनिया जो दिख रही है यहाँ से

आ नही सकती यहाँ।


देख लो कुछ लोग

तुम्हारा प्यार पाने

और रास्ता बनाने के लिये ध्यान में हैं।


हर चीज जो यहाँ आती है

तुमसी हो जाती है

अब देखो न आग

कितनी ठंढी है यहाँ,


तूफान जैसे गोल गोल होंठों से

निकलता हुआ धुँआ

आंधी जैसे बहती हुयी

सुबह का शीतल हवा

इतिहास जैसे झरते हुये तुम

और बनता हुआ एक रास्ता


तुमसे दुनिया तक

दुनिया से तुम तक

जैसे कि अब तक का बना

सबसे सुंदर पुल

हमारे तुम्हारे बीच।


कितनी दिलचस्प लगती है ये दुनिया

इस पुल के नीचे से

बहती हुयी नदी की तरह

और तुम एक ठहरा हुआ पल

मुझसे आलिंगनबद्ध

इस पुल पर।


लोग कहते हैं समय नहीं रुकता

जाता ही कहाँ है

ठहरा ही तो रहता है तुम्हारी तरह

हमारे तुम्हारे बीच के पुल पर

आलिंगनबद्ध इस पल की तरह।


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