STORYMIRROR

SUMAN ARPAN

Abstract

3  

SUMAN ARPAN

Abstract

तुम क्या जानो

तुम क्या जानो

1 min
219

मर मर क्या है जीना, तुम क्या जानो?

इंतज़ार में क्या है तड़पना, तुम क्या जानो?

तड़प देख कर हमारी ख़ुदा ने कहा,

क्यूँ देते हो खुद को इस कदर सजा !

कहा हमने हँस कर, सजा नहीं दीवानगी है!

दीवानी बन कर जीना क्या है तुम क्या जानो?

मर मर.....


शबरी रोज फूल चुनती थी इंतज़ार में, 

आंसूओं से बुहारती आँगन वो, राम के प्यार में!

नहीं जानती थी कि राम कब आयेंगे?

लागी जो प्रेम की लगन क्या है, तुम क्या जानो?

मर मर....


प्रेम क्या है मीरा से पूछे कोई?

कैसे हँस हँस के विष को पीता कोई!

महलों की थी जो रानी, बन गई प्रेम दीवानी !

वो वीणा और बाँसुरी का राग क्या है तुम क्या जानों ?

मर मर....


राधा हर पल श्याम श्याम गाती रही!

मुरली मनोहर प्रेम की वो बजाती रही?

प्रेम का देखो अनुपम असर !

श्याम श्याम गाते गाते राधा, ख़ुद श्याम हो गई!

प्रेम में ख़ुद को भूला देना, प्रेम में ख़ुद को मिटा देना

क्या है तुम क्या जानो?

मर मर...


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract