तुम ही जीवन प्राण
तुम ही जीवन प्राण
चंचल तेरे नयन, चाल है अति मतबाली ।
मन्द अधर पर हास, मनहु हो मय की प्याली ।
काले काले केश, घटा से मुख पर छाये ।
लखा हुआ बेचैन, आप कब मिलने आये ।।
याद तुम्हारी करूं, नाम रसना लेती है ।
धक धक बोले ह्रदय, याद जीवन देती है ।
मिलो कभी एकांत, भेद मन के खुल जाएं ।
तन मन दोनो मिले, युगल हम मिल हो जाएं ।।
करनी है कुछ बात, मिलो आकर के प्यारी ।
मेटो मन के भेद, रहो ना होकर न्यारी ।
दिल मे कितना प्यार , बताऊं तुमको कैसे ।
तुम बिन जीवन भार, बिताऊं जीवन कैसे ।।
जादू ऐसा चला, हो गये हम दीवाने ।
नींद भूख ना रही, दु : ख विरला ही जाने ।
व्याकुल विकल अधीर, भला मन कैसे माने ।
श्वास श्वास पर बास, रहो ना अब अनजाने ।।
जीवन का तुम सार, मुझे नि :सार न कीजे ।
तुम हो कोमल परस, वेदना सब हर लीजे ।
नयनों का सुख आप, वास मम उर मे कीजे ।
हे मम जीवन प्राण, हमारी भी सुधि लीजे।।
