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Nand Kumar

Abstract

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Nand Kumar

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तुम ही जीवन प्राण

तुम ही जीवन प्राण

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चंचल तेरे नयन, चाल है अति मतबाली ।

मन्द अधर पर हास, मनहु हो मय की प्याली ।

काले काले केश, घटा से मुख पर छाये ।

लखा हुआ बेचैन, आप कब मिलने आये ।।


याद तुम्हारी करूं, नाम रसना लेती है ।

धक धक बोले ह्रदय, याद जीवन देती है ।

मिलो कभी एकांत, भेद मन के खुल जाएं ।

तन मन दोनो मिले, युगल हम मिल हो जाएं ।।


करनी है कुछ बात, मिलो आकर के प्यारी ।

मेटो मन के भेद, रहो ना होकर न्यारी ।

दिल मे कितना प्यार , बताऊं तुमको कैसे ।

तुम बिन जीवन भार, बिताऊं जीवन कैसे ।।


जादू ऐसा चला, हो गये हम दीवाने ।

नींद भूख ना रही, दु : ख विरला ही जाने ।

व्याकुल विकल अधीर, भला मन कैसे माने ।

श्वास श्वास पर बास, रहो ना अब अनजाने ।।


जीवन का तुम सार, मुझे नि :सार न कीजे ।

तुम हो कोमल परस, वेदना सब हर लीजे ।

नयनों का सुख आप, वास मम उर मे कीजे ।

हे मम जीवन प्राण, हमारी भी सुधि लीजे।।


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