तुम बिन जिया जाये कैसे!!!
तुम बिन जिया जाये कैसे!!!
मेरा पहला प्यार तुम ही हो,
कौन कहता है कि तुम नहीं हो !!
तुम मेरी हर सांस में हो,
तुम दिन के सुकून में हो,
तुम रात की नींद में हो,
हां ये सच है !!कि .....
तुम बिन आज भी नींद नहीं आती,
पर सोने की कोशिश रहती है,
ख़्वाब में तुम आ जाओ,
और बिखरे सपने को सजा जाओ,
तुम बिन अधूरी सी हूं,
पर तुम्हरे हर सपने को,
पूरा करने की जिद रखती हूं।
आजकल अलसाई सी रहती हूं,
हिम्मत नहीं होती खुद को समेटने की,
पर अपने आंसु खुद ही पोंछ लेती हूं।
मेरी मांग का सिंदूर भरती हमारी ये फ़ोटो,
दर्पण में देखकर खुद को, खूब रोती हूं।
कोई समझ नही सकता,
मेरे इस विरह के दुःख को,
इसलिए खुशी अपने लिए,
अब खुद लिखती हूं।
यूं तो हर खुशी पराई सी,
लगती है तुम बिन!!!!
लेकिन फिर तुम्हारे सपनों की खातिर,
फिर से जीने लगती हूं।
उम्र के इस पड़ाव पर अकेले चलना,
अब कठिन लगता है लेकिन,
ठोकरे भी खा लेती हूं ।
एक शख्स जो मेरी जिंदगी है,
वो सिर्फ़ तुम हो !!
उसे दिल में ज़िंदा रखती हूं।
बस अब जी लेती हूं,
हर तन्हाई दवा बन पी लेती हूंz
दूसरी दुनियां से जब तुम देख रहे होगे,
यही सोचकर दर्द में भी मुस्करा देती हूं।

