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Divyanshi Triguna

Abstract Fantasy

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Divyanshi Triguna

Abstract Fantasy

तुम और मैं..!

तुम और मैं..!

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तुम और मैं और हमारी ज़िन्दगी,

तुम और मैं और बेचारी ज़िन्दगी,

          निकल पड़े हैं एक राह पर, 

          बस अपने प्रेम की बांह पकड़,

ना जाने कि कल क्या होगा,

ना जाने इस पल क्या होगा,

          प्रेम ही है हमारी ज़िन्दगी, 

          प्रेम ही मेरे मन की खुशी,

ज़िन्दगी में प्यार से बढ़कर, 

कुछ नही इंतज़ार से बढ़कर,

          मोहिनी मूरती, सांवरी सूरती

          तेरे प्रेम में मैं तो हूं रति,

तुम नही तो हम भी नहीं,

तुम से ही हैं हमारी ज़िन्दगी,

          बहता पानी नीर बना हैं,

          सुर, संगम, मन धीर बना हैं,

सीख लिया हैं धीरज धरना,

श्याम नाम का जप अब करना,

          लागी लगन बस तेरे नाम की,

          तू ही रहें मेरे मन में यहीं,

मौसम बदले, प्यार ना बदले

ना बदले, इंतज़ार ना बदले 

        

          बदले चाहे दुनिया सारी, 

          ना बदले मेरे मोहन मुरारी, 

मुझको मिलीं हैं जन्नत सारी,

जब से मिलें हैं कृष्ण मुरारी,

          मन मन्दिर अब श्याम बसे हैं,

          वो ही सब तन, मन हों चुके हैं 

श्याम का नाम हैं सबकुछ हीं,

और नही अब और कुछ भी,

          ध्यान तेरा इस मन रहता हैं,

          श्वास के जैसे तू बहता हैं,

हर सवेरा तेरी मुस्कान हैं,

हर शाम में श्याम विराजमान हैं,       

          फिर भी, तुम और मैं और हमारी ज़िन्दगी,

          कितनी सुन्दर और प्यारी ज़िन्दगी,

प्रेम ही है अब हमारी ज़िन्दगी, 

प्रेम ही मेरे मन की खुशी,

          प्रेम से तुमको पाती हूं, श्याम..

          प्रेम श्याम मन ध्याती हूं..!


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