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Dr.SAGHEER AHMAD SIDDIQUI डॉक्टर सगीर अहमद सिद्दीकी

Romance

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Dr.SAGHEER AHMAD SIDDIQUI डॉक्टर सगीर अहमद सिद्दीकी

Romance

तुझसे जो इश्क किया सबसे है रिश

तुझसे जो इश्क किया सबसे है रिश

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तुझसे जो इश्क किया सबसे है रिश्ता टूटा ।

वर्क़ दर वर्क़ पढ़ा असबाक़ से नाता टूटा।

किस तरह लुट गया यह दिल ही मेरे सीने से।

ना कोई ज़र्ब लगा ना कोई ताला टूटा।

जितने भी ख़्वाब सजाए थे सभी टूट गए ।

दिल ऐसे टूटा है जैसे कोई शीशा टूटा।

रात यह कैसे गुजा़री है इज़तराबी में।

कहर बनकर के सुबह मुझ पे उजाला टूटा।

सोना, चांदी, हीरा, मोती ना कोई शीश महल।

सभी बेकार हुए प्यार का धागा टूटा।

जिंदगी मौत के साए में जी रही है सगी़र।

अब तो लगता है किसी शाख से पत्ता टूटा।


शब्दार्थ:

वर्क दर वर्क= page to page सभी पृष्ठ

असबाक= lesson, पाठ

जर्ब= सेंध,beating,stoke

इज़तराबी= घबराहट, बेचैनी,anxity



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