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Madhu Vashishta

Action Inspirational

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Madhu Vashishta

Action Inspirational

टुकड़ों में बंटी जिंदगी

टुकड़ों में बंटी जिंदगी

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छोटे-छोटे टुकड़ों में बंट जाता है यह दिन।

कितनी जल्दी बीत जाता है यह दिन।

सुबह उठते ही बहुत से सपने सजाते हैं,

जाने कितने काम करने के लिए जरूरी लग जाते हैं।

दिन बीतता है काम रह जाते हैं

जो करना चाहते हैं वह कहां कर पाते हैं?

सुबह दोपहर शाम, रात क्यों जिंदगी को बांटा है टुकड़ों में?

किस पकड़ें किसे छोड़ें यूं ही समय बीतता है उलझनों में।

हे प्रभु बाकि जिंदगी एक बार पूरी फैला कर दे दे।

खोल दे, बिखेर दे ज़िंदगी के हर पल यूं ही बिना ओर छोर के।

जिंदगी को सागर सी लहरा कर दे दे।

लहरों से यूं ही उठेंगे यूं ही डूबेंगे,

मस्ती में हर पल जी लेंगे।

लहरों से बहते, लहरों में बहते बेफिक्र जीवन हम जी लेंगे।



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