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Rekha Verma

Romance


4.5  

Rekha Verma

Romance


ट्रेन का शायराना सफर

ट्रेन का शायराना सफर

2 mins 242 2 mins 242

ट्रेन का वह सफर मुझे आज भी याद है
प्रेम का वह उपहार बरसों बरस
आज भी मेरे साथ है
वो ट्रेन में मेरा पहला सफर था

कुछ खुशी कुछ रोमांच का सा आलम था
मैं बेफिक्र होकर ट्रेन के सफर का
आनंद ले रही थी
कुछ कविता और कुछ शायरी
मन ही मन बुन रही थी
सहसा एक नौजवान मुझ से टकराया
एसक्यूज़ मी मिस कहकर

बात को आगे बढ़ाया
आपको ऐतराज नहीं हो
तो मैं बगल वाली सीट पर बैठ जाऊं
कुछ शेर शायरी गीत गजल कह जाऊं
मुझे वह बंदा बड़ा अजीब सा लगा
उसके हाव-भाव से दिल फरेब सा लगा

मेरी अनुमति पाकर वह सीट पर बैठ गया
नजर इधर उधर ना दौड़ाई
बस कॉपी कलम में सहज गया
जो भ्रांति थे मन में पाली
यह पड़ गई एकदम काली

वह बंदा तो एकदम क्यूट सा निकला
मेरी तरह शेर शायरी का भूत सा निकला
स्टेशन जब उसका आया
तो वह उतर गया
अपनी शेरो शायरी की नोटबुक
वह बर्थ पर छोड़ गया
मैं दौड़ी दौड़ी उसके पीछे तक गई
लेकिन अफसोस है आंखों से ओझल गया
खोलकर देखी उसकी नोटबुक
ऊपर शेरो शायरी लिखी थी

नीचे उसके फोन नंबर
और एड्रेस की लाइनें लिखी थी
मैंने फोन को घुमाया
उसके नोटबुक मिसिंग का राज समझाया
वह तुरंत लौट कर आया
और अपनी नोटबुक पाकर बड़ा ही मुस्कुराया
दिल ही दिल हमारा आभार जताया
शायद ट्रेन के सफर की

यह हमारी पहली मुलाकात थी
होठों पर मुस्कुराहट थी
आंखों में प्यार वाली बात थी
प्यार कि हमारे ये पहली बरसात थी
ट्रेन का यह मेरा पहला सफर
दिल को बड़ा ही गुदगुदाया।


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