STORYMIRROR

Anil Jaswal

Tragedy

4  

Anil Jaswal

Tragedy

टोलू और ठोलू।

टोलू और ठोलू।

1 min
398

आज ये जमाना,

आ गया,

हर तरफ मशीनों से,

काम चल पड़ा,

कई हाथ बेकार हो गये,

इसमें टोलू और ठोलू भी आ गये।


पहले मालिक,

सुबह उठते,

उनके पास आता था।

उन्हें चारा और चन्ना,

खिलाता था,

फिर मालिश‌ का भी,

दौर‌ चलता था,

तब जाकर,

शरीर खेत में,

उतरता था।


अब एक,

खट खट खलनायक,

आ गया।

बस तेल पीता है,

बिना थके,

कई टोलू और ठोलूओं का,

काम कर देता है।


मालिक अब देखता भी नहीं,

बस खुंटें से खोल देता,

और डंडे लगा,

बाहर का रास्ता दिखाता।

कोई चरने नहीं देता,

अगर थोड़ा दिखे,

तो गऊ मैया,

मुंह साफ करें,

अगर हम लगें,

तो सब डंडें उठाकर,

पीछे हो लें।

मैया तो दूध दे,

इसलिए हरा पावे,

हम तो,

बस खाएं खाएं,

अब तो जीने के भी,

लाले आ गए।


सरकार से किया,

हमने अनुरोध,

हमें भी दें,

कुछ फ्री चारा,

जिससे पेट पाल पाएं,

हम भी,

इज्जत से रह पाएं,

म्युनिसिपलिटी गटर के,

नजदीक न जाएं।


हमारे एक दोस्त,

दयावान मनुष्य ने,

सुझाव दिया।

क्यों न,

एक सेंचुरी बना दी जाए,

और हम लोगों को,

उसमें छोड़ दिया जाए,

न‌ मालूम कब होगा,

सुझाव अच्छा लगता।



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy