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Anju Singh

Abstract


4.8  

Anju Singh

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" तस्वीरें "

" तस्वीरें "

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दिल के कोरे कागज़ पर

बनाती हूं कुछ तस्वीरें

मन के आते-जाते भावों को

उकेरती हूं तस्वीरों में

जो एहसास दिलाती है 

कई रूप रंगों का

कई अच्छे बुरे अनुभवों का


अपने ज़हन में उकेरी हुई 

तस्वीर को कहाॅं हम मिटा पाते

वो तो पुनः यादों

में है लौट आती

पर इन तस्वीरों को हम

कहॉं देख पाते तस्वीरों में


खूबसूरत एहसासों को हम 

जब कैद करते हैं तस्वीरों में

तभी गुजरी हुई यादों को

हम देख पाते हैं तस्वीरों में


जहां देखो वहां दिखती है

विविधता भरी तस्वीरें

जीवन में कई विचारों के

रंग भरतीं है तस्वीरें


निगाह जो पड़ती है 

कुदरत की बनाई तस्वीरों पर

मन झूम उठता है 

देखकर इन तस्वीरों को


दिल के आंगन में है उतरता

प्रकृति का खूबसूरत रूप

कभी शीतल ओस की बूंदे 

कभी सुनहरी किरणों का धूप


तस्वीरें तो होती है 

हमारी जिंदगी का आईना

इससे हम कई चीजें सीखते

बन जाती हमारी प्रेरणा


तस्वीर बदलती जाती है

पीढ़ी दर पीढ़ी

पर इस से नाता ना टूटता

जुड़ता जाता हर घड़ी


जिंदगी की भीड़ में

आज लोग खो रहे हैं

हर पल अपनों से

बेगाने हो रहे हैं

तस्वीरों पर तो 

धूल की परत पड़ती जा रही

जिंदगी की तस्वीर भी

धूमिल होती जा रही


बनाओ अपनी ऐसी तस्वीर

जिसे कोई भुला ना सके

तुम्हारी खूबसूरत बातों को

कोई मिटा ना सके

क्योंकि हमें भी एक दिन

बन जानी है तस्वीर



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