तराना
तराना
सोचता हूं तुझे जब भी, बात हो ही जाती है
महज़ इत्तेफ़ाक है ये या मरासिम पुराना ।
हक़ीक़त नहीं, ख्वाबों में,मुलाकात हो जाती है
ख्वाब में ही बन रहा ,तेरा-मेरा एक फ़साना।
तू ही लगती दुनिया में हसीन सबसे ज्यादा
तुझ सा ना लगा कोई, जितना भी देखा ज़माना।
एक चाहत है तू मिले, पास रहें ज़िंदगी भर
ज़िंदगी भर हो मेरा , तेरी ही ख़ातिर कमाना।
लफ़्ज़ हो तेरे लिए, सारी नज़्मे हो तेरी
सूने अल्फाज़ को बना दे, तू एक खूबसूरत तराना।

