STORYMIRROR

Aishani Aishani

Romance

4  

Aishani Aishani

Romance

तलाश..!

तलाश..!

1 min
319

जिसको मै तलाशती रही वर्ष दर वर्ष

कभी झील / नदी / समंदर /

कभी पर्वत/चट्टान 

धरती / आकाश/ पाताल / हवा / पानी

विराने से लेकर बहारों तक से पूछा पता

हँसी / ख़ुशी / ग़म सब में तलाशा जिसे

वो तुम ही थे क्या ..? 


कब कहाँ से आ गए 

राख में छिपी चिंगारी को हवा देने

और अब जब कि... 

आग से बचने की सलाह देने आये हो..!

संभव है क्या...? 

आग लेकर चलना और आग से बच जाना

राख समेटना और चिंगारी से दूरी बनाना..! 

ये सब उस तलाश का हिस्सा ही तो है ना..!! 



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance