Dinesh Uniyal
Fantasy Children
बन के तितली उडूं जहां में
इधर-उधर मंडराऊं
फूलों का रस लेकर अपनी
सारी प्यास बुझाऊं
रंग अनोखा देख कर अपना
मन ही मन इतराऊं
बच्चों के संग खेल खेल के
बहुत खुश हो जाऊँ
प्रकृति से प्यार करूँ मैं
इसमें ही खो जाऊँ
किस्मत
सपना
कोरोना एक वैं...
तितली
गमे जिंदगी
खिलौना
कभी तुम यूँ करना कि हमेशा के लिए सिर्फ मेरे हो जाना। कभी तुम यूँ करना कि हमेशा के लिए सिर्फ मेरे हो जाना।
हाँ! बेमानी है तुम्हें ढूंढना , जग के किसी भी नज़ारे में! हाँ! बेमानी है तुम्हें ढूंढना , जग के किसी भी नज़ारे में!
सोचती हूँ मन तो तू मेरा है तो क्या इज़ाज़त लू मैं माथा तेरा चूमने से पहले। सोचती हूँ मन तो तू मेरा है तो क्या इज़ाज़त लू मैं माथा तेरा चूमने से पहले।
ख़ुदा की रहमत से जज़्बात उतरे कागज़ पर। ख़ुदा की रहमत से जज़्बात उतरे कागज़ पर।
सारे धर्म के सम्मान में, सिर उनका खुद झुक गया। सारे धर्म के सम्मान में, सिर उनका खुद झुक गया।
परिस्थितियाँ अनुकूल होगी इस पर जागता विश्वास है। परिस्थितियाँ अनुकूल होगी इस पर जागता विश्वास है।
कल्पना को हकीकत बना नहीं पाती हूँ कल्पना को हकीकत बना नहीं पाती हूँ
हवा के हिंडोले पर बैठ कर चाँद के घर दावत पर चल। हवा के हिंडोले पर बैठ कर चाँद के घर दावत पर चल।
वरना गलती निकालने वाले तो ताज महल में भी निकालते हैं। वरना गलती निकालने वाले तो ताज महल में भी निकालते हैं।
स्वीकृति भी धरा की छोर-छोर नज़र आती है रूत ये सावन चित्तचोर नज़र आती है। स्वीकृति भी धरा की छोर-छोर नज़र आती है रूत ये सावन चित्तचोर नज़र आती है।
सर्वशक्तिमान होने का गुरुर कोई तो है जिसके आगे हो तुम सब बेबस, मज़बूर। सर्वशक्तिमान होने का गुरुर कोई तो है जिसके आगे हो तुम सब बेबस, मज़बूर।
सपने देखो जरुर देखो बस उनके पुरे होने कि शर्त मत रखो ---चित्रपट: दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगे (1995) सपने देखो जरुर देखो बस उनके पुरे होने कि शर्त मत रखो ---चित्रपट: दिलवाले दुल्हनि...
उसके खातिर मेरे हर दुआ को तुने अपनी रजा दी है। उसके खातिर मेरे हर दुआ को तुने अपनी रजा दी है।
तो अगर परवाह करना भी गलत है तो हाँ मैं बेवकूफ हूँ। तो अगर परवाह करना भी गलत है तो हाँ मैं बेवकूफ हूँ।
आकाश के पार कहीं दूर जाना चाहता हूं। आकाश के पार कहीं दूर जाना चाहता हूं।
तुम मुझे लगता था नई इन्सान अपने के बारे सोच कर सकते खुद को संभालो। तुम मुझे लगता था नई इन्सान अपने के बारे सोच कर सकते खुद को संभालो।
क्यूंकि जीवन की लंबाई नहीं जीवन की गहराई मायने होती है। क्यूंकि जीवन की लंबाई नहीं जीवन की गहराई मायने होती है।
ख्वाबों की वो तितलियाँ.. ख्वाबों की वो तितलियाँ..
बस एक महफ़िल हो, जिसके मंच पर हर कवि हो । बस एक महफ़िल हो, जिसके मंच पर हर कवि हो ।
ऐसा लगता है जैसे हम नहीं, कविता हमें रच रही है। ऐसा लगता है जैसे हम नहीं, कविता हमें रच रही है।