Rishabh Tomar
Classics
श्वेत रंग में प्यार और सम्मान भरा है
हरे रंग खुशहाली का गुलदान भरा है।
लाखों हुये स्वाह और लाखों तत्पर है
केशरिया में वीरों का बलिदान भरा है।
मेरे राम अब भ...
जूही का फूल
कोई भी नही अप...
तुम्हारा चंदर
धरती दिल की ...
जय जय भोले जय...
जनवरी औऱ तुम
मेरी राधिका
मौत तेरी बाहो...
रूह का तुम हो...
भारत के स्वर्णिम इतिहास की तुम गौरव गाथा हो गए गिर धरती माँ के आंचल में तुम आसमानी हो भारत के स्वर्णिम इतिहास की तुम गौरव गाथा हो गए गिर धरती माँ के आंचल में तुम ...
एक अच्छा नागरिक एक नेक इंसान में कहीं न कहीं होती है गुरु की पहचान। एक अच्छा नागरिक एक नेक इंसान में कहीं न कहीं होती है गुरु की पहचान।
खाली टोकरी उठाकर घर की ओर चल पड़ीआज उम्मीद ना होते हुए भी उसका माल सही दामों में बिक चुक खाली टोकरी उठाकर घर की ओर चल पड़ीआज उम्मीद ना होते हुए भी उसका माल सही दामों में ...
उदारता से उपभोग करने लगे अपनी समृद्ध राज्यलक्ष्मी का वो। उदारता से उपभोग करने लगे अपनी समृद्ध राज्यलक्ष्मी का वो।
विदुर जी पूछें मैत्रेय जी से स्वयंभुवमनु का चरित्र सुनाएँ ! विदुर जी पूछें मैत्रेय जी से स्वयंभुवमनु का चरित्र सुनाएँ !
गिर धरती माँ के आंचल में तुम आसमानी हो गए । गिर धरती माँ के आंचल में तुम आसमानी हो गए ।
ब्रह्मा जी कहें प्रभु मैंने आपको बहुत समय के बाद है जाना ! ब्रह्मा जी कहें प्रभु मैंने आपको बहुत समय के बाद है जाना !
बंधनों से वो मुक्त हो गए प्रभु का परमपद पा लिया। बंधनों से वो मुक्त हो गए प्रभु का परमपद पा लिया।
सुनकर प्रश्न मैत्रेय जी बोले करूँ आरम्भ मैं भागवत पुराण का ! सुनकर प्रश्न मैत्रेय जी बोले करूँ आरम्भ मैं भागवत पुराण का !
द्रोपदी के केश थे खींचे दुश्शाशन ने भरी सभा में ! द्रोपदी के केश थे खींचे दुश्शाशन ने भरी सभा में !
है सौगंध तुम्हें नहीं भूलेंगे, देश की हो सच्ची पहचान। है सौगंध तुम्हें नहीं भूलेंगे, देश की हो सच्ची पहचान।
सृष्टि के प्रारम्भ में प्रसन्न करें ब्रह्मा इसी धारणा से श्री हरि को! सृष्टि के प्रारम्भ में प्रसन्न करें ब्रह्मा इसी धारणा से श्री हरि को!
ब्रह्मा जी ने जब अंधकार का कारण बताया सब देवताओं को ! ब्रह्मा जी ने जब अंधकार का कारण बताया सब देवताओं को !
शुकदेव जी ने जो कुछ कहा था जब यही बात पूछी परीक्षित ने। शुकदेव जी ने जो कुछ कहा था जब यही बात पूछी परीक्षित ने।
माता पिता जब चले गए तो देवहूति सेवा करें कर्दम की ! माता पिता जब चले गए तो देवहूति सेवा करें कर्दम की !
उठो चलो अब अपने पथ पर, जो भी तुम संकल्प लिए हो। उठो चलो अब अपने पथ पर, जो भी तुम संकल्प लिए हो।
उन मनुष्यों का कल्याण है होता जिनका चित मुझमें स्थिर होता है। उन मनुष्यों का कल्याण है होता जिनका चित मुझमें स्थिर होता है।
मृत्यु लोक को छोड़कर मैं अब अपने धाम को जाना चाहूँ । मृत्यु लोक को छोड़कर मैं अब अपने धाम को जाना चाहूँ ।
दाढ़ों की नोक पर पृथ्वी ला रहे वराह भगवान को देखा था वहां। दाढ़ों की नोक पर पृथ्वी ला रहे वराह भगवान को देखा था वहां।
जो अन्तरात्मा ही क्षेत्रज्ञ है करना चाहिए उसका चिंतन हमें। जो अन्तरात्मा ही क्षेत्रज्ञ है करना चाहिए उसका चिंतन हमें।