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Shailaja Bhattad

Abstract

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Shailaja Bhattad

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तीर

तीर

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तीर की तरह शब्द  गहरे घाव करते हैं। 

और वह है कि,  यूं ही कह दिया था कहकर चलते बनते हैं।

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खरपतवार जब घेरने लगे उससे कट जाना अच्छा होता है । 

शोषण के बीज को रौंदने में ही सबका भला होता है।


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