Shailaja Bhattad
Abstract
तीर की तरह शब्द गहरे घाव करते हैं।
और वह है कि, यूं ही कह दिया था कहकर चलते बनते हैं।
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खरपतवार जब घेरने लगे उससे कट जाना अच्छा होता है ।
शोषण के बीज को रौंदने में ही सबका भला होता है।
जयश्री राम
ओम नमः शिवाय
श्री राम ध्या...
हे प्रभु
जय जय श्रीराम...
राम- भरत
श्री राम- भरत
हिन्दी नारे
श्रीराम
होली है
वक्त और दौलत पाई दोनों में बस ये अंतर है। वक्त और दौलत पाई दोनों में बस ये अंतर है।
उस आंदोलन के गीत को खामोशी ने निगल लिया, और, वह पल भी राख का कण बन गया। उस आंदोलन के गीत को खामोशी ने निगल लिया, और, वह पल भी राख का कण बन गया।
हमें अवसर मिला, वो खुशी आज भी दिल के करीब है, हमें अवसर मिला, वो खुशी आज भी दिल के करीब है,
जिनकी अस्वस्थता के कारण ही डाँ. राजेन्द्र प्रसाद जी अध्यक्ष बने थे जिनकी अस्वस्थता के कारण ही डाँ. राजेन्द्र प्रसाद जी अध्यक्ष बने थे
रखी है निष्ठा जो रघुनाथ पर। आशीष रहा है सदा माथ पर। रखी है निष्ठा जो रघुनाथ पर। आशीष रहा है सदा माथ पर।
तुम धारा बनकर गंगा की संग मेरे बह पाओगी ना । तुम धारा बनकर गंगा की संग मेरे बह पाओगी ना ।
श्रेय को गर सिद्ध किया तब, अक्षय पुण्य कमाना है। श्रेय को गर सिद्ध किया तब, अक्षय पुण्य कमाना है।
हम भी चट्टान बन कर खड़े, हर एक लहर तब लगी चटखने हम भी चट्टान बन कर खड़े, हर एक लहर तब लगी चटखने
मिलेगा प्रेम तब हमको, जब हम लुटाएंगे प्यार। मिलेगा प्रेम तब हमको, जब हम लुटाएंगे प्यार।
ज्ञान का विस्तार करते हैं विचार या ज्ञान में विस्तृत होते हैं विचार ज्ञान का विस्तार करते हैं विचार या ज्ञान में विस्तृत होते हैं विचार
यूं लड़ने को शस्त्र अनेकों शस्त्र धैर्य सा कोई नहीं है। यूं लड़ने को शस्त्र अनेकों शस्त्र धैर्य सा कोई नहीं है।
छूटने दो कुछ , मगर टूटने मत देना जकड़ रख मगर पकड़ ढीली रख।। छूटने दो कुछ , मगर टूटने मत देना जकड़ रख मगर पकड़ ढीली रख।।
उलझन को सुलझाने का ये हुनर, इन धागों में छिपे जीवनी मुहर। उलझन को सुलझाने का ये हुनर, इन धागों में छिपे जीवनी मुहर।
हरियाली विहीन धरा का नव निर्माण कर रहे हैं हरियाली विहीन धरा का नव निर्माण कर रहे हैं
राम नाम रस पीने वाले, भवसिंधु से उतरें। राम नाम रस पीने वाले, भवसिंधु से उतरें।
नई साल अब आने को है और पुरानी बीत रही है। नई साल अब आने को है और पुरानी बीत रही है।
धरती की गोद गाते गीत दीवाने, कभी तप्त कदम , छांव दे मुहाने। धरती की गोद गाते गीत दीवाने, कभी तप्त कदम , छांव दे मुहाने।
सपनों को पंख देना सीखना होगा, ना गुनगुनाऊं बस हवाओं के भरोसे। सपनों को पंख देना सीखना होगा, ना गुनगुनाऊं बस हवाओं के भरोसे।
माॅंगना है तो मांगें केवल, प्रभु दीजिए अनन्य भक्ति। माॅंगना है तो मांगें केवल, प्रभु दीजिए अनन्य भक्ति।
क्या ये यादें हैं या तेरा नशा बेहिसाब? क्या ये यादें हैं या तेरा नशा बेहिसाब?