तेरी मुरली बोल रही है
तेरी मुरली बोल रही है
भक्त-
तेरी मुरली बोल रही हैं, राधा का नाम क्यों,
तेरी मुरली बोल रही हैं, राधा का नाम क्यों,
तेरे दिल को खोल रही हैं, जिसमें राधा नाम यूँ,
तेरी मुरली बोल रही हैं, राधा का नाम क्यों,
बोलो श्याम क्यों.......
तू क्यों चाहे राधा को इतना, जितना किसी और को नहीं,
तू क्युँ कहता, कुछ भी नहीं हैं,
बोलो श्याम क्यों, श्याम के क्यों.......
कृष्ण-
मेरी मुरली राधा नाम हैं, राधा का नाम ही श्याम हैं,
मैं हूँ उसमे इतना, इतना, जितना मैं कही और नहीं,
मैं चाहूँ उसको दिल से, वो चाहें आत्मा से कहीं,
मेरे रोम रोम में वो बसी, या उसके रोम मैं कही,
उसके जैसा कोई और नहीं, मेरी राधा, श्याम दीवानी वहीं,
तेरी मुरली बोल रही हैं, राधा का नाम क्यों,
तेरे दिल को खोल रही हैं, जिसमें राधा नाम यूँ।

