Unlock solutions to your love life challenges, from choosing the right partner to navigating deception and loneliness, with the book "Lust Love & Liberation ". Click here to get your copy!
Unlock solutions to your love life challenges, from choosing the right partner to navigating deception and loneliness, with the book "Lust Love & Liberation ". Click here to get your copy!

Dr Ranjana Verma

Romance

3  

Dr Ranjana Verma

Romance

तेरी घरनी की आस

तेरी घरनी की आस

1 min
445


सुन बादल ले जा सन्देशा निर्मम प्रिय के पास

कहना अब तक मरी नहीं तेरी घरनी की आस।


आयत नयन किया करते हैं

अब भी नभ से होड़

जब तब ग़म की बदली घिरके

देती है जल छोड़।


निशि दिन नयन बरसते फिर भी बुझे न मन की प्यास

मरती देह नहीं मरती पर कभी मिलन की आस।


उमड़ उमड़ कर नदिया बहती

मिलती जल की धार

मधुर मिलन की आस लिये मन

तुझको रहा पुकार।


तुझ बिन व्याकुल रोम रोम मन पंछी बहुत उदास

मरती देह नहीं मरती पर कभी मिलन की आस।


उमड़ घुमड़ घन घिरे गगन में

किन्तु न बरसे नीर,

तरस रहे प्राणी सब जल बिन

बरस बरस बेपीर।


बूँद बूँद हित तरसे धरती अब मत करो निराश

मरती देह नहीं मरती पर कभी मिलन की आस।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance