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Nishi Bhatt

Tragedy


4.4  

Nishi Bhatt

Tragedy


तेरे लिए

तेरे लिए

3 mins 109 3 mins 109

तेरे लिए एक क्या, हज़ार अपमान

खुद पर बर्दाश्त कर सकती है ये भूमि,

पर तू उसका साथ तो देता !

सिर्फ उसका तो रहता !

उसे तो समझता ! ?

   

जब तक तेरी हर गलती को भूल /नादानी

समझकर वो माफ़ करती रही,

तेरी हर परिस्थिति में,

तेरे हर बुरे वक्त में तेरे साथ रही,

तुझे समझती रही 

तब तक तूने उसे देवी बना दिया था,

    

और आज, जब उसने

पहली बार खुद के लिए सोचा 

तो तूने उसे सबके सामने बेइज़्ज़त कर दिया ?

उसे अकेला छोड़ दिया? 

यही जाना अपने प्यार को इतने सालों में ?


अरे जिस भूमि ने और छह महीने

इंतज़ार करने की बात की ,

वो भी सिर्फ इसलिए, ताकि तुझ पर

आने वाली हर मुसीबत टल सके,

तूने उसी इन्सान को आज ये कह दिया की,

उसे तुझ से हर बात पर शिकायत है ? 

 

अरे एक बार उसका प्यार से

हाथ थाम कर तो देखता, 

उसपर भरोसा तो करता,

उसका साथ तो देता और फिर देखता !


पर याद रखना -

तुझे हर इन्सान मिलेगा ज़िंदगी में,

पर ऐसा नहीं मिलेगा-

जिसने सिर्फ तेरी ख़ातिर,

अपने टूटे दिल के बावजूद भी

तुझ से प्यार किया 

जिसकी सेवा करने के लिए

वो मीलों दूर आ जाया करती थी। 

                        

एक बार भी अपने सपनों,

अपनी ख़ुशियों का ख्याल नहीं था उसे,

सब कुछ छोड़कर,

बस तेरा साथ चाहती थी वो,

तेरा वक्त चाहती थी वो,

तेरे साथ अपनापन चाहती थी वो,

हर दुआ मैं तुझे मांगती थी वो,

तेरे हर ख़ुशी में खुश होती थी वो,

तेरे हर दुःख में उदास हो जाती थी वो !

     

कहते हैं एक बार विश्वास टूट जाये,

तो वापिस कभी नहीं जुड़ता ,

पर उसे खुद के विश्वास चूर हो जाने से ज्यादा सुकून,

तेरे बारे में सोचने पर मिलता था !

खुद भूखी रहती थी पर तुझे बिना खाये

घर से कभी जाने नहीं देती थी

       

अरे लोग तो आजकल बस पैसा,

शोहरत, रुतबा, सूरत ये सब देख कर प्यार करते हैं 

पर उस भूमि ने बस तेरी सीरत देखी, 

उसे तो ये तक नहीं पता था,

की तू रहता कहा है? तेरा घर कहा है ?

          

और उस जैसे इंसान को तूने आज क्या जाना ?

ये की, वो तुझ से झगड़ा करती है,

तुझे छोड़ जाने की बातें करती है ?

या तुझ से हर बात पर शिकायत करती है ?

    

कभी इन सब बातों के पीछे की

वजह जानने की कोशिश करना

कभी उसकी जगह खुद को रखकर सोचना,

तब शायद तुझे उसका दर्द,

उसकी तकलीफ़ का एहसास हो, 

     

कोई इंसान यूँ ही नहीं बदलता,

यूँ ही छोड़ कर नहीं जाता, 

हर बात की अपनी एक सीमा होती है,

उसके दिल में बहुत दर्द होता है!

बशर्ते वो कभी महसूस हो ?

    

आज भूमि ने पहली बार अपने स्वाभिमान का

मान रखकर खुद के लिए सोचा है 

तो आज वो तेरी नज़रों में गलत हो गयी, 

पर कल तक वही भूमि,

जिसने तुझे हर गलत राह से निकाल कर,

सही राह दिखाई, तुझे संभाला,तेरा ख्याल रखा 

वो महान बन गयी थी तेरे लिए ! सबसे ख़ास बन गयी थी। 


काश कभी तू उस भूमि को दिल से समझ पाता,

उसके त्याग को, उसके समर्पण को देख पाता तो 

आज तुझ से ज्यादा खुशनसीब इंसान इस दुनिया में,

और कोई नहीं होता ! 

       

पर एक दिन जरूर आएगा

जब तेरी नज़र में मेरी इन बातों का मोल होगा,

पर शायद,तब तक बहुत देर हो चुकी होगी !



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