तेरे बगैर
तेरे बगैर
तेरे बग़ैर कभी चैन से न हुई बसर
औऱ तुझे उसकी भी न हुई ख़बर
यादों में ही जिंदगी गई गुज़र
मेरे शब्दो पर तेरी कभी गई नहीं नज़र
न तुझ पर मेरी हालात का हुआ कुछ असर
औऱ तू छोड़ मुझे चला अपनी डगर
मैं तेरी ही यादों में जीती रही मगर
कुछ तेरी यादों का रहा यूँ कहर
कट ही जायेगा यादों में जीवन सफर
वक्त नहीं रुकता कभी रहा हैं बस गुज़र
तूने दिल दुखाने में नहीं छोड़ी कोई कसर
शायद ही कभी पाऊंगी तेरी यादों से उभर
गवाह हैं मेरे प्यार का तेरा ये शहर
तूने तो कभी की नहीं मेरे प्यार की कदर
अनजाने ही सही किया मेरे दिल पर कहर।
