STORYMIRROR

Amit Kumar

Abstract Drama Tragedy

3  

Amit Kumar

Abstract Drama Tragedy

तेरा जाना

तेरा जाना

1 min
280

कुछ बेचैन सा कर गया था

मेरे दिल को

कहीं भीतर तक

लेकिन मैं स्तब्ध बोध से

विस्मृत भाव को जाग्रत कर

उन माजी के दरीचों से झांककर

जब भी देखता हूँ

बहुत दूर तक सोचता हूँ

बड़ी देर तक सोचता हूँ

मेरी उम्र का एक बेहतरीन पड़ाव था

तेरा आना

और मेरी ज़िंदगी का एक गमगीन दौर रहा

वो तेरा जाना।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract