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Gulshan Sharma

Tragedy

4  

Gulshan Sharma

Tragedy

ताकतवर की झूठन

ताकतवर की झूठन

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छाती चौड़ा कर चूहा

निकलता है जंगल में,

शेर के सो जाने के बाद,


ख्वाहिशों को पर देता है इंसा,

समाज के सो जाने के बाद,

कुत्तों को मिलती हैं

खाली सड़कें दादागिरी को,

आदमी के सो जाने के बाद,


धूप मिलती है नीचे वालों को,

ऊंचों से हो जाने के बाद,

नई कमीज़ आती हैं घर किसी के,

किसी के लिए वो पुरानी हो जाने के बाद,


कमज़ोर के हिस्से आती है क्यों हमेशा,

ताकतवर की झूठन।


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