STORYMIRROR

Gulshan Sharma

Abstract

3  

Gulshan Sharma

Abstract

वो मुझे देखेगा

वो मुझे देखेगा

1 min
204

मुझे, फिर मेरी कविता एक नज़र देखेगा,

चीर देगा वो मुझे इस कदर देखेगा,


हंसेगा बहुत मुझसे कत्ल हुआ मुर्दा,

मोहब्बत से भरी जब मेरी ग़ज़ल देखेगा,


उसके सामने कैसे मतले पढूंगा प्यार के, 

एक बार घाव खुद का फिर मेरी शकल देखेगा,


गाढ़ो या जलाओ, या बहा दो पानी में, 

मरते वक़्त कहा था उसने वो मुझे देखेगा |


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract