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Jhilmil Sitara

Romance

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Jhilmil Sitara

Romance

सूर्यमुखी सी मोहब्बत मेरी

सूर्यमुखी सी मोहब्बत मेरी

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सूर्यमुखी सी मोहब्बत करती हूँ तुझसे

मेरी चाहत के आसमां के सूरज हो तुम।


करती हूँ सर झुकाकर इंतजार मेरे महबूब

पड़ते ही रौशनी तुम्हारी हो जाती हूँ निहाल

जिधर मुड़ते हो तुम उधर ही मुस्कुराकर देखती हूँ

बिना तुम्हारे मुझे नहीं इन दिशाओं का ख्याल।


सूर्यमुखी सी मोहब्बत करती हूँ तुमसे

मेरी चाहत के आसमां के सूरज हो तुम।


अपने रंग - रूप से क्या रिझाऊं मैं तुम्हें

तुम्हारी हर अदा पर फ़िदा है ये दिलो जान

करती हूँ मिन्नतें दिन-रात मैं तुम्हारे ही लिए 

होकर जुदा तुमसे मिट ही जायेगा मेरा ये जहाँ।


सूर्यमुखी सी मोहब्बत करती हूँ तुमसे

मेरी चाहत के आसमां के सूरज हो तुम।



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