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V. Aaradhyaa

Classics

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V. Aaradhyaa

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सूर्य किरण दिनमान

सूर्य किरण दिनमान

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अब भोर भई रोशन हुआ,फैला प्रकाश चहुंओर।

ना कर अपमान प्रकृति का,मन हो जाए विभोर।।


आसमान में बिखर गई, सूर्य किरण दिनमान।।

जीवन हो सबका तेज मय, मिटे कष्ट व्यवधान।।


रैन बिताई सोई कर, आया दिन का राज।

कर्म - धर्म की जा शरण, बन जाओ सरताज।।


समय साथ संग जो चला, मिला ध्यान औ ज्ञान।

जो नर समय गंवा दिया, निरा मूर्ख समान।।


सूर्य -चांद आसमां देते हैं सदा प्रेम विषेश।

मानव जीवन तो अनमोल है सभ्यता का अवशेष।।


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