सुहाना दर्द
सुहाना दर्द
दिल का दर्द सुहाने लगा है
प्यार जो बढ़ जाने लगा है
रातों को नींदों से जागते हैं
तारों में वो दिख जाने लगा है
अंधेरे में रहना अब,
हमें अच्छा लगता है
अब अंधेरों से ही साखी
चराग़ जल जाने लगा है
कुछ तो हो गया है तुझे,
ये दिल रेगिस्तान में भी,
बारिश के गीत गाने लगा है
दिल का दर्द सुहाने लगा है
बेमतलब हंसना, बेमतलब रोना
ये दिल बिना शराब के ही,
दर्द से नशा कर जाने लगा है
अब ज़ख्म हंसने लगा है मेरा,
दिल अब लहू से ही
दिल को सहलाने लगा है
दर्द अब सुहाने लगा है।

