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Rajni Sharma

Drama

3  

Rajni Sharma

Drama

सुबह का भुला

सुबह का भुला

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रूह है मेरी 

ज़िन्दगी के कसौदे 

चलना है इसपे 

झुक-झुक के।

कब कैसे मुझसे 

खता हो गयी 


तेरी नज़र में 

मैं उतर गयी।

न टूटी मैं 

हमारे रिश्ते के वास्ते 

सफर कैसे मुकम्मल होगा 

भटकती मंजिल के रास्ते।


मान लो मेरी बात 

कर दो मुझे माफ 

सुबह का भुला, घर आया है 

सांझ हो जायेगी अब साफ।


रात बीते दिन चढ़ेगा 

किरण उंजाला लायेगी 

मेरे प्यारे जीवन साथी 

इस तरह उम्र क्ट जायेगी।


सब कुछ छूटा है मुझसे 

जग भी रूठा-रूठा है 

तुम साथ न, मेरा छोड़ना कभी 

बस इतना सा वादा है।


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