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Alok MS

Abstract Others

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सत्य और आभास

सत्य और आभास

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जहाँ सत्य को पहचान छुपानी पड़े,

क्या वहां असत्य का राज्य नहीं?

जहाँ स्नेह को, हाँ में हाँ मिलनी पड़े,

क्या वहां बेगानेपन का एहसास नहीं?

जहाँ गलत, सुधारने को कतराना पड़े,

तुम्हीं बोलो,

क्या वहां विकृति का निवास नहीं?


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