#सपनों की दुनिया
#सपनों की दुनिया
सपनों की दुनिया,
का सफर बड़ा ही मासूम होता है।
कोई दिन में सपना देखता,
तो कोई रातों-रात देखें सपनों को सच कर लेता है।
हर रोज कुछ नया,
करने का अंतस कोलाहल शोर मचाता है।
नित्य नई उम्मीदों की कालीन पे,
एहसासों का दरबार सजकर संवरता है।
लेकिन इतना आसान नहीं है,
सपनों की दुनिया को हकीकत में गले लगाना।
स्वप्न के पराग निगाहों से झाड़,
मेहनत की भट्टी में खुद को झोंक कुंदन सा तपजाना।
अधूरी ख्वाहिशें में ही,
पड़ता है सबको अपना-अपना जीवन जीना।
हर रोज टूटना और टूटकर बिखरना,
खुद को खुद से संभाल बार-बार कोशिश करलेना।
इरादों को
मजबूत रख हौसलों में उड़ान भरलेना,
गिरना,संभालना
और शुन्य से फिर एक नई शुरुआत कर लेना।
मनीषा मारु
नेपाल
