सोचिए ज़रा...आत्महत्या से पहले
सोचिए ज़रा...आत्महत्या से पहले
ठहर जाता कुछ पल
शायद कुछ अच्छा हो जाता
थोड़ी कोशिश और करता
शायद कुछ नया हो जाता
अपने पिता का ख्याल करता
अपनी बहनों से बात करता
बस ठहर जाता कुछ पल
मालूम है मुझे ये ज़िन्दगी आसान नहीं
कभी धूप है
पर ऐसा नहीं कि छाँव नहीं
पता नहीं कौन सा सपना तेरा पूरा हो जाता
बस कुछ पल और ठहर जाता
प्यार, परिवार, प्रसिद्धि, पैसा
सब कुछ मिल जाता
बस थोड़ा और ठहर जाता
दुनिया से जाना ही है हम सबको एक दिन
पर इतनी सी नादानी ना करता
सोचता कुछ अच्छा
शायद कुछ अच्छा हो जाता
बस कुछ पल और ठहर जाता
ज़िंदगी में खुदा ने क्या लिखा
ये कैसे तू जान पाता
थोड़ी और हिम्मत रखता
सब संवर जाता
बस कुछ पल और ठहर जाता
मुस्कुराहट के पीछे कितना है दर्द
किसी को कुछ तो बताता
कितना टूटा है अंदर से कितना उलझा सा है
किसी को तो समझाता
बस कुछ पल और ठहर जाता
बहुत मुश्किल था तेरा तनाव भरा जीवन
पर अंधेरे के बाद ही तो उजाला है आता
जितना गहरा अंधेरा होता
उतना ही गहरा उजाला होता
बस कुछ पल और ठहर जाता
बस कुछ पल और ठहर जाता
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सुशांत को समर्पित
