STORYMIRROR

Bharti Bourai

Romance

4  

Bharti Bourai

Romance

संयोग

संयोग

1 min
497

संयोग भी 

यूँ ही नहीं होता 

विधाता जब 

लिख रहा होता है भाग्य 

तभी संयोग/वियोग/ इत्तफ़ाक

सब कुछ अंकित कर देता है 

हर किसी के भाग्य लेख में.!


तभी तो 

मिले थे संयोग से 

गाड़ियों के शोर के बीच

लोगों की भीड़ में भी,

विधाता रच रहा था लीला 

हमारे संयोग की 

बेखबर थे हम 

दुनिया/जहान से..!


सुनो!

लिखी थी 

प्रेम कथा 

उसी ने हमारी 

हम तो उसे जी रहे थे 

उसके लिखे अनुसार..!


सच 

कितना 

अच्छा लगता है 

विधाता के लिखी 

प्रेम कथा का पात्र बन कर 

प्रेम में जीना और प्रेम में मरना..!



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance