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ritesh deo

Tragedy

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ritesh deo

Tragedy

संविधान मेरा लाचार है।

संविधान मेरा लाचार है।

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नियम कानून का भंडार है,

फिर भी संविधान मेरा लाचार है।।

कब तक महिलाएं अपनी सुरक्षा की बाते सिर्फ सुनेगी...?

कब तक आख़िर...कब तक व्यर्थ के ताने सहेगी...?

कभी उनकी सुरक्षा की व्यवस्था पर सवाल तो उठाओ....,

कभी उन्हें सुरक्षित होने का एहसास तो दिलाओ।।

नियम कानून जाननें मात्र से कुछ अच्छा नही होने वाला,

किस्मत की लकीरों से कुछ सच्चा नहीं होने वाला,

सच के लिए आवाज तो उठाओ।।

महिला सुरक्षा के मुद्दे को आगे बढ़ाओ,

गलत करने वालो को सजा के बजाए आजादी क्यों...??

इनको बचाकर देश की बर्बादी क्यों...?

बेईमानो को जेल में चाय और काफी क्यों...?

रेप,हत्या करने वालो को माफी क्यों...??


क्या संविधान मेरा डरता है..???

गलत करने वाले से आख़िर डर कैसी...?

और बेईमानों की मौत पर अखर कैसी...?


क्यों वो उसका साथ नही देता जिसके साथ अन्याय हुआ है...??

समझौता ही किसी अपराध का पर्याय क्यों..?

उसका साथ क्यों नही देता जिसके घर की इज्जत लूट ली जाती है...??

आख़िर क्यों उनको इतनी छूट दी जाती है...?

कब तक ऐसे चलेगा, क्या संविधान बस किताब बन कर रहेगा..??

कब इस देश में न्याय का नया आफताब उगेगा...?

कितनी बेटियां लूट ली गई है क्या वो अंजान है नारी की महानता से...??

क्यों भेदभाव करते हैं क्या मतलब है फिर समानता से...??

नौ दिन पूजा करते हैं उस मिट्टी की मूरत की,

फिर क्यों लूटी जाती अस्मत किसी भोली भाली सूरत की...?

कब तक सिर्फ बातें सुनेंगी महिलाए अपने सुरक्षित होने का,

क्या उन्हे नहीं है डर अपने अस्तित्व के खोने का..?

निर्भया,बिलकिश बनो, न जानें कितनो को लूटा है..??

कितनी अभिलाषाओं को हवस की ओखली में कुटा है...

संविधान पढ़ने वालों पढ़ने से क्या होगा इन्हे इंसाफ तो दिलाओ।।

कभी उन्हें सुरक्षित होने का एहसास तो दिलाओ।।

अब बतलाओ कब हो रहा इस बात पर विचार है...??  

नियम कानून का भंडार है,

फिर भी संविधान मेरा लाचार है।  


           


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