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Dhan Pati Singh Kushwaha

Abstract

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Dhan Pati Singh Kushwaha

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संवेदना यंत्र-स्टेथोस्कोप

संवेदना यंत्र-स्टेथोस्कोप

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श्वास-धड़कन की सुन के पुकार,

बता देते हो तन-मन के सभी विचार।

रूधिर का दाब -गति और उसका प्रवाह,

फेफड़ों से श्वास-प्रश्वास में वायु की राह।


अनुमान अवस्था का लगाती है इनकी चाल,

स्वस्थ है तन-मन जो मिलती लय और ताल।

विषम ध्वनि- गति कहती है कुछ हुआ बिगाड़,

बरतिए संयम - लीजिए औषधि की भी आड़।


काश! जग में होता कोई एक ऐसा भी यंत्र,

जॉंच सकता मानवीय- वेदनाएं सभी स्वतंत्र।

भेद बिन सब करें अगाध सब से ही प्यार,

वह औषधि दे दो हर मानव को करतार।


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