संस्मरण
संस्मरण
मॉं और बेटी संस्मरण आज से लगभग बारह वर्ष पहले की बात है,गर्मी का मौसम था और हमारा स्वास्थ्य खराब था। शाम के सात बजे हम रसोईघर में प्रेसर कुकर में पुष्टाहार दलिया बना रहें थे। दलिया में बहुत से प्रकार के दाने शामिल थे जैसे जौ, बाजरा, मूंगदाल,गेहूं, तिल, चावल, आदि। हम सीटी आने का इंतजार कर रहे थे। बहुत देर हो गई पर सीटी नहीं आई थी । उसी समय हमारी छोटी बेटी स्वीटी जो लगभग 7 साल की थी वह दौड़ते हुए आई और हमको पकड़ कर बोली मम्मी क्या बना रहें हैं ? हमने बताया कि दलिया बना रहें हैं। मम्मी मेरे लिए भी मैगी बना दो मुझे भी मैगी खाना है । प्लीज़ मम्मी आज बस दे दो फिर एक महीने तक मैगी बनाने को नहीं बोलेंगे। हम एक पैकेट मैगी निकाल कर बनाने लगे। बेटी से हम बोले स्वीटी यह कुकर बहुत देर से रखा है लेकिन इसमें कुछ भी आवाज नहीं आ रही है उसने कहा क्यों मम्मी ? हम चम्मच से सीटी को उठा कर देखे तो कोई भी आवाज नहीं आई, गैस बिल्कुल भी नहीं निकल रही थी,एक दम चुप, हम घबराए हुए स्वर में अपनी बिटिया से बोलें कि बेटा लगता है यह ब्लास्ट होने वाला है । हमने इतना बोला और कुकर तेजी से गेंद के सामान उछल कर ऊपर गया और आकर के गैस चूल्हे के पर तेज आवाज के गिरा । हम दोनों वहीं खड़े थे। एक दम से घबरा गए ,कुछ समझ में नहीं आ रहा था क्या करें। स्वीट को जल्दी से पकड़े। और देखने लगें चूल्हा चकनाचूर हो गया, उसके एक एक पुजें टूट गये । गैस चालू थी वह बुझ गई और जो काला पत्थर के ऊपर चूल्हा रखा हुआ था वह पत्थर टूटकर बीच से दो टुकड़े में बदल गया, नीचे चावल,आटे के कुछ डिब्बे रखें हुए थे उसमें गिरकर टिक गया। हम दोनों वहीं खड़े थे कुकर जैसे ही गिरा तो उसका ढक्कन निकलकर तूफान की तरह उड़कर बेटी के कान के पास से गया और दरवाज़े के पास गिर गया। जैसे ही कुकर फूटा तो उसके अन्दर की गैस रसोईघर में फ़ैल गई। हम लोगों को एकदम से गर्म लगा गर्मी के दिन थे। मई का महिना था। हम बेटी का हाथ पकड़ कर रसोईघर से बाहर आ गए । हमारे चेहरे का रंग उड़ गया,हम घबराए हुए कांपने लगे,घर से बाहर आए । बाहर देखते हैं कि पड़ोसी भी घरों से बाहर आ गए और एक दूसरे से पूछ रहें थे क्या हो गया ? हमने बताया कि हमारे घर कुकर ब्लास्ट हो गया। कैसे ? दलिया बना रहें थे। छोटे-छोटे दाने वाली हमने बोला--हॉं आंटी। आंटी ने कहा अरे ! मेडम जले तो नहीं ? नहीं,आज तो बाल-बाल बच गए, स्वीटी भी हमारे साथ खड़ी थी भगवान ने बचा लिए। कहते-कहते हमें ध्यान आया कि रेगुलेटर की बटन चालू है। हम हिम्मत दिखाते हुए धीरे-धीरे रसोईघर की तरफ अपने कदमों को बढ़ाए, और देखें कि रसोई में सब ठीक तो है, कहीं आग तो नहीं है,अच्छी तरह चारों ओर नज़र घुमाकर देखने के बाद हम जाकर बटन बंद किये। हमारे पीछे-पीछे पड़ोसी भी रसोई में देखने के लिए आए । जब उन्होंने देखा कि क्या हालत हो गई गैस चूल्हा और प्लेट फार्म की ? सभी ने कहा भगवान ने बचा लिया मेडम, बहुत बड़ी घटना होने से बच गई। लगता है कुकर की सीटी में दाने फंसने के कारण इतने बड़ा हादसा हुआ है। इतने बड़े हादसे के बाद मॉं और बेटी को एक खरोंच भी नहीं आई यह सब ईश्वर की कृपा है। सभी भगवान को धन्यवाद देते हुए बाहर आ गए। हम भी बाहर आकर सोचने लगे कि सच आज भगवान ने बचा लिए। भगवान को धन्यवाद दिए,हाथ जोड़कर प्रार्थना किए आने वाली हर मुसीबत से हमारी रक्षा करना। हम आपका यह उपकार कभी नहीं भूलेंगे। श्रीमती त्रिवेणी मिश्रा जया जिला-डिंडौरी मध्यप्रदेश
