कुंडलियां
कुंडलियां
कुंडलियॉं
1
काले मेघा
काले मेघा दीजिए,धरती को तुम नीर।
प्यासे खेतों की सभी,मिट जाएगी पीर।।
मिट जाएगी पीर,फिर फसल लहराएगी।
खुश होंगे खलियान,मातृ कजरी गाएगी।।
सुन नाचेंगे मोर,उछल जाऍंगे नाले।
पपीहा रहा देख,नीर दे मेघा काले।।
2 हरियाली
हरियाली भू में रहे, बहती रहे बयार।
मंद-मंद मुस्कान से, पहुॅंचे वन के द्वार।।
पहुॅंचे वन के द्वार,ऊॅंची पहाड़ी लगती।
जैसे करती सैर,काले मेघ सा उड़ती।।
जया देखकर इन्द्र,खुशी से बजाय ताली।
नभ में है उल्लास,सुरलोक तक हरियाली।।
3 भोर सुहानी
भोर सुहानी देखिए,नभ का अन्तिम छोर।
चार दिशाओं में सुनो, पंछी करते शोर।।
पंछी करते शोर, पूर्व में छाई लाली।
झूम रहें हैं पेड़,प्रकृति की सुन खुशहाली।।
जया बताए बात,चल थाम सुबह की डोर।
बने दिवस खुशहाल,देखें मनभावन भोर।।
4 सपने
सपने जैसे देखिए, करिए वैसे काम।
जैसी जिसकी भावना, वैसा है परिणाम।।
वैसा है परिणाम, कामना रखिए आगे।
बढ़ता चल इंसान,पथ से आलस्य भागे।।
जया जंग जन जीत,पास रहते फिर अपने।
जैसे खग हैं संग,करिए सभी सच सपने।।
5 दुनिया
मनुज की सोच देखिए,मन में जन से भेद ।
ऐसे उथले ज्ञान से,हमको होता खेद।।
हमको होता खेद, ज्ञानी खुद को बताते ।
करते हैं षड़यंत्र,पर नर मन को सताते।।
होते धोखे बाज, रखें बनावटी हुलिया ।
बोलें ये तो झूठ,बातें बनाती दुनिया ।।
6 निर्मल
निर्मल मन संसार में,मोती का भंडार।
उस जन के मन में भरे,सुन्दर सत्य विचार।।
सुन्दर सत्य विचार, चैन जीवन में रहता।
वह होता निर्दोष,नाम दुनिया में करता।।
जया हृदय रख शुद्ध,मनुज कर सेवा निर्फल।
देख रहा भगवान, प्रभु को भाय मन निर्मल।।
7 नशा करेगा नाश
नशा करेगा नाश जी,आज अभी तू छोड़।
अच्छा जीवन चाहिए, हाथ नशा को जोड़।।
हाथ नशा को जोड़,पास में रहता पैसा।
उधार रहता दूर, जीवन हो स्वर्ग जैसा।।
जया बुरा मदपान, बिगड़े काया की दशा।
होते हैं दस रोग, दृढ़ करके छोड़ें नशा।।
दोहे
सोच
आता रोना देखकर,जन की छोटी सोच।
ओछी हरकत देखिए,अक्ल में लगी मोच।।
कामों में देखें सदा,मानव का बस दोष।
वे खुद को साबित करें, बनकर के निर्दोष।।
समय एक दिन आएगा,जब बनकर वह काल।
कोई कितना भी बचें, काल करें बेहाल।।
8 संकट
संकट में होती जहां,अपनों की पहचान।
जो विपत्ति में साथ देंउन्हें अपना मान ।।
उन्हें अपना मान,समय पैसा से करते।
देकर के सहयोग,दुःख में साथी बनते।।
जया धन्य ये लोग,दूर करते हैं बंकट।
सहते जो हैं कष्ट,न आते इन पर संकट।।
श्रीमती त्रिवेणी मिश्रा जया जिला-डिंडौरी मध्यप्रदेश
