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Shweta Jha

Romance


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Shweta Jha

Romance


स्नेहबंध

स्नेहबंध

1 min 215 1 min 215

बारिश की बूंदें कर रहीं हैं अटखेलियाँ 

छिड़ी हुई है सुरमयी संगीत की धारा

मानो पूरी सृष्टि महक उठी है विशेष सुगंधी से

बारिश की बूंदें लाती हैं जीवनधारा में एक नवीनता

और


साथ ही खोल देती हैं यादों से संजोया पिटारा

पहली बारिश की खुशबू और

प्रकृति को उन्मादित करती उसकी बेपरवाह बूंदे

आज फिर ले आयी हैं तुम्हारी याद


जिनमें है तुम्हारे प्रेम की सौंधी सी खुशबू

बूंदों की अटखेलियाँ मानो सुना रहीं हैं हमारे स्नेह की भूमिका

वो क्या है ना अथाह स्नेह को व्यापकस्वरूप देने के लिए

आवश्यक है एक संगीतमय भूमिका


ये मिश्रित रंगों से सजा आकाश बना रहा है एक पृष्ठभूमि 

जिसपर सजाने को बैठी हूँ मैं,हमारे प्रेम की पातियाँ

शहरी शीशमहल के गवाक्षों पर अंकित हो रहा तुम्हारा मेरा प्रेम

ये भींगा मौसम क्या जोड़ पाएगा एक नव अध्याय (?)


मैं और तुम क्या लिख पाएंगे कोई नया स्नेहबंध (?)।



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