स्कूल भी याद करता होगा।
स्कूल भी याद करता होगा।
एकांत में वह भी तरसता होगा
सुबह के उन मेलों को
प्रार्थना और खेलों को
गुंजन के स्वरों को
किताबों के बोलो को
स्कूल भी याद करता होगा।
कतारों में खड़े मित्रों को
भागते -दौड़ते चंचल मनो को
मस्ती करते मित्रों की टोलियां को
रूठते, मनाते, हंसते उन पलों को
कक्षा की उन बातों को
विचारों और कुछ करने के जज्बातों को
स्कूल भी याद करता होगा ।
शिक्षक की शिक्षा ,विद्या के प्रकाश को
डांट और शाबाशी की बातों को
परीक्षा , प्रश्नों और उत्तरों की तलाश को
बस्ते के भारों, टिफिन के पकवानों को
एक -दूसरे का टिफिन खाने और घंटी के तराने को
घर बैठे चंचल नादानों को
स्कूल भी याद करता होगा।
कलाओं ,जन्म -दिवस ,समारोह, प्रतियोगिताओं को
नृत्य की थिरकन, कबड्डी, खो-खो के दंगलों को
कविता के बोलो ,गीतों की सरगम को
कंप्यूटर की क्लास और नाटकों की आवाज को
जन गण मन के राष्ट्रीय गान को
भारत माता की जय बोलने वाले
भविष्य के नव जवानों को
स्कूल भी याद करता होगा।
