STORYMIRROR

Kunda Shamkuwar

Abstract

4  

Kunda Shamkuwar

Abstract

राधा और मीरा

राधा और मीरा

1 min
504

नही रहना है मुझे बनके केवल तुम्हारी राधा 

ना ही रहना है मुझे बनके केवल तुम्हारी मीरा 


सदियों से मैं कृष्ण की राधा ही बनी रही 

और जमाना मुझे कृष्ण की मीरा ही कहता रहा


न मुझे मेरे राधा नाम से जाना गया 

और न मेरे भजनों से मुझे पहचाना गया 


एक सवाल करना चाहती हुँ मैं आज तुमसे 

क्या केवल कृष्ण से ही मेरी पहचान थी ?


क्या राधा की अपनी कोई पहचान नही हो सकती थी ? 

क्या मीरा के भजन भक्ति में सम्पूर्ण नहीं थे ?


'महाभारत' को वेदव्यास जी ने रचा था 

उसमे उन्होंने कृष्ण को ही तवज्जो दी 


अगर कोई वेदवती लिखे कुछ ऐसा ही काव्य तब शायद राधा और मीरा Redefine होगी


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract