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Alok Singh

Tragedy

3  

Alok Singh

Tragedy

सकारात्मक सोच

सकारात्मक सोच

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यह नफरतों के बीज जो बोए गए हैं 

कुछ खूनी खंजर जो धोए गए हैं।

धर्म के नाम पर जो बगीचा था कहीं 

वहां से कुछ जंगली फूल नोचे गए हैं ।

गलत को तुम गलत कह दो 

सही को मैं सही कह दूं 

गलत को तुम गलत कह दो 

सही को मैं सही कह दूं 

वही पुरानी किताब के कुछ

पुराने सवाल पूछे गए हैं। 

कलम भी क्या लिखें वह खुद है हैरान-परेशान 

कुछ शब्द नुकीलें धनुष के बाण से छोड़े गए हैं।

यह नफरतों के बीज जो बोए गए हैं ।


धर्म के नाम पर ईमान गिरवी हो गया है 

कहीं अल्लाह कहीं राम इंसान हो गया है 

जो कुछ लोग खून विश्वास का करने लगे हैं 

अब कुछ लोग दिल से मेरे उतरने लगे हैं 

गिरो तो इस तरह साथी कि गिर कर संभल जाओ 

अगर बहकावे में आए हो तो,

अभी भी समय है सुधर जाओ 

यह दौर भी कुछ दिनों में जाएगा बदल 

पर फसल वही होगी 

जो अब बीज बोए गए हैं 

रहूंगा मैं भी कुछ गुमशुद 

क्योंकि मेरे शब्द भी कुछ छीने गए हैं 

यह नफरतों के बीज बोए गए हैं।



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